प्रति व्यक्ति खपत में भारी वृद्धि होने से बढ़ रहा है खाद्य तेलों का आयात
25-Mar-2025 08:28 PM
मुम्बई। भारत में खाद्य तेलों की प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक खपत पिछले कुछ दशकों के दौरान तेजी से बढ़ी है जबकि देश की जनसंख्या एवं प्रति आमदनी में भी काफी इजाफा हुआ है।
इसके फलस्वरूप देश में खाद्य तेलों का उपयोग तो बहुत बढ़ गया मगर उसके अनुरूप उत्पादन में वृद्धि नहीं होने से विदेशों से इसका आयात तेजी से बढ़ता गया।
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1960-61 में देश के अंदर खाद्य तेलों की प्रति व्यक्ति औसत सालाना खपत केवल 3.2 किलो थी जो वर्ष 2030-31 तक आठ गुणा से भी ज्यादा उछलकर 40.30 किलो पर पहुंच जाने की संभावना है।
इसका मतलब यह हुआ कि अगले पांच वर्ष में स्थिति ऐसी हो जाएगी कि प्रत्येक भारतीय एक साल में 40 किलो से ज्यादा खाद्य तेल का सेवन करने लगेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक आमदनी में बढ़ोत्तरी होने, शहरीकरण का विस्तार होने तथा लोगों की खाद्य शैली में बदलाव आने से खाद्य तेलों की मांग एवं खपत तेजी से बढ़ती जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1980-81 में खाद्य तेलों की प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक खपत कुछ सुधरकर 3.8 किलो पर पहुंची मगर 21 वीं शताब्दी तक आते-आते यह तेजी से बढ़कर 2000-01 में 8.2 किलो प्रति व्यक्ति हो गई।
वर्ष 2020-21 तक यह औसत खपत पुनः दोगुने से ज्यादा बढ़कर 19.7 किलो पर पहुंची जबकि 2024-25 में इसके बढ़कर 25.3 किलो पर पहुंच जाने की संभावना है।
यदि बढ़ोत्तरी की यह रफ्तार बरकरार रही तो अगले पांच साल में यानी 2030-31 तक प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक खपत बढ़कर 40.3 किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाएगी।
भारत दुनिया में खाद्य तेलों का एक अग्रणी उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है जबकि आयात के मामले में सबसे आगे है। विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर भारत की निर्भरता बहुत बढ़ गई है
और देश में लगभग 60 प्रतिशत खाद्य तेलों की जरूरत को विदेशों से आयात के जरिए पूरा किया जाता है। इस आयात पर अत्यन्त विशाल धनराशि खर्च हो रही है।
