पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पश्चिमोत्तर राज्यों में गर्मी की तीव्रता घटी

31-Mar-2025 10:44 AM

नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ के बरकरार रहने और इससे एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन निकलकर मध्यवर्ती पाकिस्तान के ऊपर आने से भारत के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में तापमान गिर गया और ठंडी हवा के प्रवाह से गर्मी की तीव्रता घट गई।

पिछले दो-तीन दिनों से देश के पश्चिमोत्तर राज्यों में मौसम की हालत गेहूं सहित अन्य रबी फसलों के लिए काफी हद तक अनुकूल बनी हुई है। अगले दो-चार दिनों तक तापमान में ज्यादा बढ़ोत्तरी होने की संभावना नहीं है। 

मौसम विभाग के अनुसार दिन के अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ गई है लेकिन पश्चिमी विक्षोभ जब आगे बढ़कर पूर्व की दिशा में निकल जाएगा तब तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस ऊंचा हो सकता है।

बारिश की कमी से खेतों की मिटटी में नमी का अभाव बढ़ने की आशंका तो है मगर मौसम में कुछ ठंडापन होने से रबी फसलों को थोड़ी राहत मिलेगी।

अच्छी बात यह है कि इस अवधि के दौरान पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ एवं दिल्ली में 25 से 35 कि०मी० प्रति घंटे की रफ्तार से मजबूत सतही ठंडी हवा का प्रवाह जारी रहेगा जबकि पश्चिमी राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। 

उल्लेखनीय है कि पंजाब- हरियाणा में कल यानी 1 अप्रैल से गेहूं की कटाई का सीजन औपचारिक तौर पर शुरू हो जाएगा जबकि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात जैसे राज्यों में नई अगैती फसल की कटाई-तैयारी छिटपुट रूप से पहले ही आरंभ हो चुकी है।

अप्रैल से गेहूं के साथ-साथ चना, मसूर, मटर, सरसों एवं जौ सहित अन्य रबी फसलों की कटाई-तैयारी की गति भी तेज हो जाएगी। ऐसे समय में मौसम का अनुकूल होना शुभ लक्षण है।

वैसे भी उपरोक्त प्रांतों में इस बार न तो तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई और न ही बेमौसमी वर्षा का ज्यादा प्रकोप देखा गया।

फरवरी में तापमान कुछ ऊंचा हुआ था लेकिन इससे फसलों पर कोई गंभीर प्रतिकूल असर नहीं पड़ा। यदि अप्रैल में किसी प्राकृतिक आपदा और खासकर वर्षा- ओलावृष्टि का प्रकोप नहीं हुआ तो रबी फसलों के बेहतर उत्पादन की उम्मीद बनी रहेगी।