राजस्थान में अगले महीने से रबी फसलों की सरकारी खरीद होगी शुरू

24-Mar-2025 04:43 PM

जयपुर। देश के पश्चिमी भाग में अवस्थित एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रबी कालीन फसलों की खरीद अगले महीने यानी अप्रैल- 2025 से आरंभ हो जाएगी।

सरकार ने 10 अप्रैल से सरसों एवं चना की खरीद शुरू करने का निर्णय लिया है जिससे किसानों को राहत मिलेगी। सहकारिता विभाग के अनुसार दोनों प्रमुख तिलहन एवं दलहन की खरीद के लिए आवश्यक तैयारी पहले ही आरंभ हो चुकी है।

केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप राजस्थान में इस वर्ष 13.80 लाख टन सरसों एवं 6.30 लाख टन चना की खरीद की जाएगी जो बायो मैट्रिक प्रमाणित पर आधारित होगी।

राजस्थान सरसों का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है। राज्य कृषि विभाग के अनुसार चालू रबी सीजन के दौरान राजस्थान में 33.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बिजाई हुई जबकि इसका कुल उत्पादन 55 लाख टन से कुछ अधिक हो सकता है।

राष्ट्रीय स्तर पर सरसों के सकल उत्पादन में अकेले राजस्थान का योगदान 45 से 49 प्रतिशत के बीच रहता है। कृषि विभाग के मुताबिक पिछले रबी सीजन के दौरान राजस्थान में सरसों का बिजाई क्षेत्र 39 लाख हेक्टेयर तथा कुल उत्पादन 62 लाख टन रहा था। इसी तरह चना की बिजाई 20 लाख हेक्टेयर में हुई थी और पैदावार करीब 25 लाख टन आंकी गई थी। 

राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार राज्य में गेहूं का उत्पादन गत वर्ष के लगभग बराबर होने की संभावना है और जौ तथा चना का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है जबकि सरसों का उत्पादन घट सकता है क्योंकि इसके बिजाई क्षेत्र में काफी गिरावट आ गई थी।

उद्योग- व्यापार संगठनों ने राजस्थान में सरसों का उत्पादन गत वर्ष के 53 लाख टन से घटकर इस बार 51 लाख टन रह जाने का अनुमान लगाया है। 

एक अग्रणी व्यापारी के अनुसार राजस्थान की सभी प्रमुख मंडियों में नई सरसों की भारी आवक होने लगी है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी औसत दैनिक आवक बढ़कर 13-15 लाख बोरी पर पहुंच गई है।

राजस्थान में दैनिक आवक 7.50-8.00 लाख बोरी के बीच हो रही है। उत्पादन में गिरावट आने के बावजूद नई सरसों की क्वालिटी काफी बेहतर है और उसमें नमी का अंश केवल 2 से 3 प्रतिशत के बीच देखा जा रहा है। दूसरी ओर नई सरसों में तेल का अंश औसतन 40 से 43 प्रतिशत तक दर्ज किया जा रहा है। 

एक अन्य व्यापारी के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस बार राजस्थान में चना का उत्पादन 20-25 प्रतिशत ज्यादा होने की उम्मीद है क्योंकि इसके लिए मौसम काफी हद तक अनुकूल बना हुआ है।

शीतकाल के दौरान समय-समय पर बारिश भी होती रही। जहां तक जौ का सवाल है तो इसका बिजाई क्षेत्र 3 लाख हेक्टेयर से अधिक रहा और कुल उत्पादन 14 लाख टन पर पहुंच सकता है।