साप्ताहिक समीक्षा-जीरा

27-Sep-2025 08:00 PM

जीरा कीमतों में गिरावट : बिजाई घटने की आशंका 

नई दिल्ली। हालांकि चालू सीजन के दौरान प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान एवं गुजरात में पर्याप्त बारिश होने के कारण भूमि में नमी अच्छी बनी हुई लेकिन सूत्रों का कहना है कि लगातार गिरती कीमतों के कारण संभावना व्यक्त की जा रही है कि दूसरे वर्ष भी देश में जीरे के बिजाई क्षेत्रफल में कमी आएगी। अक्टूबर माह के दौरान उत्पादक केन्द्रों पर बिजाई का कार्य शुरू हो जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान देश में जीरे की बिजाई 12.64 लाख हेक्टेयर पर की गई थी। जोकि वर्ष 2025 में घटकर 11.71 लाख हेक्टेयर की रह गई है वर्तमान भावों को देखते हुए व्यापारिक धारणा है कि वर्ष 2026 के लिए भी बिजाई क्षेत्र में कमी आएगी। क्योंकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। 
भाव गत वर्ष से कम 
वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों सहित खपत केन्द्रों पर जीरा के भाव गत वर्ष की तुलना में लगभग 70/80 रुपए प्रति किलो नीचे चल रहे है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष सितम्बर- 2024 के दौरान राजकोट, गोंडल, ऊंझा मंडी में जीरे का एवरेज क्वालिटी का भाव 240/250 रुपए प्रति किलो चल रहा था। जबकि दिल्ली बाजार में डबल दीपक ब्रांड का भाव 280 रुपए बोला जा रहा था। जबकि वर्तमान में गोंडल राजकोट एवं ऊंझा मंडी में जीरे के भाव 165/180 रुपए बोले जा रहे है। दिल्ली बाजार में डबल दीपक का भाव 208/210 रुपए बोला जा रहा है लेकिन इन भावों पर मांग का अभाव बना हुआ है। 
आवक 
कुल उत्पादन का अधिकांश माल मंडियों में आ जाने के कारण वर्तमान में मंडियों में आवक सीमित चल रही है। प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक 8/9 हजार बोरी की हो रही है जबकि गोंडल एवं राजकोट में आवक 1500/2000 बोरी की चल रही है। राजस्थान की मेडता मंडी में आवक 1500/2000 बोरी की हो रही है इसके अलावा नागौर, जोधपुर में आवक 800/1000 बोरी की हो रही है। जानकारी का कहना है कि कुल उत्पादन का लगभग 70/75 प्रतिशत माल मंडियों में आ चुका है। 30 किसानों के पास 25/30 प्रतिशत माल का स्टॉक है जोकि धीरे-धीरे बाजार में आएगा। क्योंकि नई फसल आने में अभी लगभग 4/5 माह का समय शेष है। 
मन्दा-तेजी
जानकारों का कहना है कि हाल-फिलहाल कीमतों में अधिक तेजी की संभावना नहीं है। क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में टर्की, सीरिया, अफगानिस्तान के जीरे की बराबर सप्लाई बनी रहने के कारण भारतीय जीरे में निर्यात मांग कमजोर चल रही है। उल्लेखनीय है कि अगस्त माह के अंत में भारतीय जीरे का निर्यात भाव 3900 रुपए प्रति 20 किलो बोला जा रहा था जोकि वर्तमान में 3750 रुपए चल रहा है। अभी बाजार 3/5 रुपए प्रति किलो के मंदा-तेजी के बीच चलते रहे। आगामी दिनों में उत्पादन केन्द्रों पर बिजाई का रिपोर्ट स्पष्ट होने के बाद अधिक मन्दा-तेजी का अनुमान लगाया जाएगा। वैसे सूत्रों के मानना है कि वर्तमान भावों में अब अधिक मन्दा संभव नहीं है। क्योंकि भाव काफी नीचे आ गए हैं इसके अलावा आगामी दिनों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में विदेशी जीरे की सप्लाई भी घटनी शुरू हो जाएगी। जिस कारण से अक्टूबर-नवम्बर माह में भारतीय जीरे का निर्यात बढ़ने की संभावना है साथ ही लोकल मांग भी बढ़ने का अनुमान है। क्योंकि त्यौहारी सीजन के अलावा विवाह-शादी का सीजन भी शुरू हो जाएगा। 
निर्यात कम 
कमजोर निर्यात मांग के चलते चालू वित्त वर्ष 2025-26 के प्रथम चार माह में जीरा निर्यात में मात्रात्मक रूप से 19 प्रतिशत एवं आय में 29 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2025 के दौरान जीरा निर्यात 78278 टन का हुआ। और निर्यात से प्राप्त आय 1871.79 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-जुलाई- 2024 के दौरान जीरा का निर्यात 97168 टन का हुआ था और प्राप्त आय 2652.46 करोड़ की रही थी। वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान जीरे का कुल निर्यात 229881.67 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 6178.86 करोड़ की रही थी।