साप्ताहिक समीक्षा - लालमिर्च
25-Oct-2025 06:18 PM
मध्य प्रदेश में नए लालमिर्च की आवक शुरू : कीमतों में अधिक मन्दा नहीं
नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान लालमिर्च में कारोबार कम रहा। क्योंकि त्यौहारी सीजन होने के कारण अधिकांश खपत केन्द्रों की मंडियों पर अवकाश रहा। निर्यात व्यापार भी सीमित रहा। प्रमुख उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश में बारिश के कारण गुंटूर मंडी में आवक भी कम रही। हल्के मालों की आवक रही। मध्य प्रदेश की मंडियों में नए मालों की आवक शुरू हो गई है। आवक का दबाव नवम्बर माह में बनेगा। लेकिन पैदावार कम रहने के कारण आवक का दबाव बनने के बावजूद कीमतों में अधिक मन्दा संभव नहीं है। सूत्रों का कहना है कि बिजाई के समय लालमिर्च के भाव कम होने के कारण सभी उत्पादक राज्यों में इस वर्ष बिजाई क्षेत्रफल में कमी आई है। मध्य प्रदेश में इस वर्ष बिजाई क्षेत्रफल में 25/30 प्रतिशत की कमी की गई है जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में बिजाई 30/35 प्रतिशत कम रहने के समाचार मिल रहे हैं। कर्नाटक में भी बिजाई गत वर्ष की तुलना में कम रही है। बिजाई क्षेत्रफल में कमी आने के कारण दूसरे वर्ष भी लालमिर्च उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है। आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में नए लालमिर्च की आवक जनवरी माह में शुरू हो जाएगी।
उत्पादन
कमजोर बिजाई एवं वर्तमान में चल रहे प्रतिकूल मौसम के चलते दूसरे वर्ष भी देश में लालमिर्च की पैदावार घटने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि चालू सीजन के दौरान मध्य प्रदेश में लालमिर्च का उत्पादन 20/25 लाख बोरी होने की संभावना है। जबकि वर्ष 2024 में उत्पादन 30/32 लाख बोरी एवं वर्ष 2023 में 35/38 लाख बोरी उत्पादन के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
प्रमुख उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में भी जनवरी माह में आने वाली फसल भी कम मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में आंध्र प्रदेश में लालमिर्च की पैदावार लगभग 2 करोड़ बोरी (प्रत्येक बोरी 40/45 किलो) के आसपास मानी गई थी जोकि वर्ष 2024 में घटकर डेढ़ करोड़ बोरी के स्तर पर आ गई है। चालू वर्ष 2025-26 के दौरान भी पैदावार में कमी आने के समाचार मिल रहे हैं। अनुमान व्यक्त किया जा रहा है कि आने वाली फसल 1/1.25 करोड़ बोरी के आसपास ही रहेगी। तेलंगाना में भी उत्पादन घटने की संभावना व्यक्त की जा रही है। गत वर्ष तेलंगाना में उत्पादन 60/65 लाख बोरी का माना गया था जबकि वर्ष 2023 में 75/80 लाख बोरी का उत्पादन रहा था।
मन्दा-तेजी
जानकारों का मानना है कि लालमिर्च की कीमतों में हाल-फिलहाल अधिक मन्दा-तेजी की संभावना नहीं है। मध्य प्रदेश में आवक का दबाव बनने पर कीमतों में 2/4 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ सकती है। इससे अधिक मंदा संभव नहीं है। क्योंकि आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंडी में अच्छी क्वालिटी की आवक कम हो रही है। जबकि निर्यात मांग बराबर बनी हुई है। वर्तमान में गुंटूर मंडी में लालमिर्च की आवक 30/40 हजार बोरी की चल रही है। जबकि खम्मम में आवक 8/10 हजार बोरी की हो रही है। गुंटूर मंडी में तेजा क्वालिटी का भाव 147/148 रुपए एवं खम्मम में भाव 150/151 रुपए प्रति किलो बोला जा रहा है।
निर्यात अधिक
बांग्ला देश की बराबर लिवाली बनी रहने के कारण चालू वित्त वर्ष के प्रथम चार माह में लालमिर्च के निर्यात में शानदार 63 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जबकि भाव कम होने के कारण आय में 31 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जुलाई- 2025 के दौरान लालमिर्च निर्यात 270867 टन का हुआ। और निर्यात से प्राप्त 3888.61 करोड़ की रही। गत वर्ष अप्रैल-जुलाई- 2024 में लालमिर्च का निर्यात 165923 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 2977.95 करोड़ की रही थी। वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान लालमिर्च का कुल निर्यात 715506 टन का हुआ। और प्राप्त आय 11404.90 करोड़ की रही।
