साप्ताहिक समीक्षा-धान-चावल

22-Mar-2025 08:40 PM

वैश्विक प्रतिस्पर्धा के असर से धान-चावल बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव     

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय चावल निर्यात बाजार की स्थिति अभी विचित्र हो गई है। अपने निर्यात संवर्धन के लिए या किसान, थाईलैंड, वियतनाम एवं म्यांमार के निर्यातक चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में कटौती कर रहे है और उसकी प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के कारण भारतीय निर्यातकों को भी चावल का दाम घटाना पड़ रहा है। 
निर्यात 
बासमती चावल का निर्यात ऑफर मूल्य पिछले साल 1050 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहा था जो अब घटकर 900-950 डॉलर प्रति टन रह गया है। इसके फलस्वरूप मिलर्स-प्रोसेसर्स को किसानों से ऊंचे दाम पर धान खरीदने का प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। गैर बासमती चावल की कीमतों में भी गिरावट आ गई है। 
दिल्ली 
घरेलू प्रभाग में मुख्यतः बासमती धान की आवक हो रही है और कमजोर कारोबार के बीच इसकी कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। 15-21 मार्च वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली की नरेला मंडी में 1509 हैण्ड धान का भाव 300 रुपए घटकर 2725 रुपए प्रति क्विंटल रह गया मगर 1509 कम्बाइन तथा 1718 धान के दाम में क्रमश: 80 लाख एवं 50 रुपए प्रति क्विंटल का सुधार दर्ज किया गया। नरेला मंडी में 10-12 हजार बोरी धान की दैनिक आवक हुई। नजफगढ़ मंडी में 1500-2000 बोरी धान की आवक के साथ-साथ लगभग स्थिर बना रहा।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ की भाटापाड़ा मंडी में एचएमटी धान का भाव 100 रुपए तेज तथा श्रीराम धान का दाम 200 रुपए प्रति क्विंटल नरम रहा। वहां धान की 500-700 बोरी आवक हो रही है। राजिम मंडी में सीमित कारोबार के साथ भाव स्थिर रहा। अगले महीने से कुछ राज्यों में रबी कालीन धान के नए माल की आवक शुरू होने की संभावना है और तब कारोबार की स्थिति बेहतर हो सकती है। पंजाब तथा हरियाणा की मंडियों में मुख्यतः बासमती धान की आपूर्ति हो रही है और इसकी मात्रा भी सीमित रहती है। इससे कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा जा रहा है। 
उत्तर प्रदेश 
लेकिन उत्तर प्रदेश की विभिन्न मंडियों जैसे- एटा-मैनपुरी, जहांगीराबाद, शाहजहांपुर, अलीगढ़ एवं खैर तथा राजस्थान की बूंदी मंडी में धान की सामान्य आवक जारी है। केन्द्र सरकार से 100 प्रतिशत टूटे चावल के निर्यात की अनुमति प्रदान कर दी है लेकिन भारत में इसका निर्यात ऑफर मूल्य पाकिस्तान, वियतनाम एवं म्यांमार से ऊंचा चल रहा है। गैर बासमती सफेद एवं सेला चावल के निर्यात मोर्चे पर भी चुनौती बरकरार है।