सरकारी खरीद एवं आयात शुल्क लगने पर सुधर सकता है चना का भाव
27-Mar-2025 05:09 PM
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों में चना के नए माल की जोरदार आवक शुरू होने तथा विदेशों से सस्ता आयात जारी रहने से इस महत्वपूर्ण दलहनों की कीमतों में शीर्ष स्तर के मुकाबले काफी गिरावट आ गई है। इसे देखते हुए सरकार को एहतियाती कदम उठाने पड़ रहे हैं।
एक तरफ वह देसी चना पर आयात शुल्क लगाने का प्लान बना रही है तो दूसरी ओर किसानों से विशाल मात्रा में इसकी खरीद की तैयारी भी कर रही है।
चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2023-24 सीजन के 5440 रुपए प्रति क्विंटल से 210 रुपए बढ़ाकर 2024-25 सीजन के लिए 5650 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि अधिकांश थोक मंडियों में भाव घटकर उससे नीचे आ गया है। इससे किसानों की चिंता और बेचैनी बढ़ गई है।
विदेशों से चना का आयात 31 मार्च 2025 तक शुल्क मुक्त है। शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा आगे बढ़ने में तो संदेह है लेकिन साथ ही साथ इस पर भारी-भरकम सीमा शुल्क लगने की संभावना भी कम दिखती है।
केन्द्रीय पूल में दलहनों का स्टॉक घटकर बहुत कम रह गया है और सरकार इसे बढ़ाने का इरादा रखती है। ऐसी हालत में एकाएक ऊंचे शुल्क के कारण यदि आयात प्रभावित होता है तो चना का दाम बढ़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर पहुंच सकता है और तब सरकार को इसकी खरीद करने में भारी कठिनाई हो सकती है।
इसी ऊंचे भाव के कारण पिछले साल भी सरकार को चना खरीदने में ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई थी। भारत में देसी चना का आयात मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया तथा अफ्रीकी देशों से हो रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में इस बार चना का शानदार उत्पादन हुआ जिससे भारत में इसका आयात बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। मई 2024 में सरकार ने चना के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी।
प्रमुख उत्पादक राज्यों में एमएसपी पर किसानों से जोरदार खरीद शुरू होने पर चना के दाम में कुछ मजबूती आ सकती है।
यदि आयात शुल्क लागू हुआ तो उसका भी कुछ असर पड़ेगा। चना का घरेलू उत्पादन 5 लाख टन बढ़ने का अनुमान केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने लगाया है।
