सरकार द्वारा अगले माह चीनी उद्योग के लिए कुछ सकारात्मक निर्णय लेने की उम्मीद
19-Dec-2025 08:42 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण सचिव ने कहा है कि इस बार भी प्रबल संभावना है कि सरकार चीनी उद्योग की समस्याओं एवं कठिनाइयों को दूर करने के लिए अगले महीने कुछ सकारात्मक निर्णय ले सकती है।
दरअसल अधिशेष उत्पादन के कारण इस बार चीनी की भरमार होने की संभावना है और यदि इसकी तेजी से बिक्री नहीं हुई तो उद्योग की मुद्रा प्रवाह में अवरोध उत्पन्न होने की आशंका रहेगी जिससे छनि मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया तेजी से बढ़ सकता है।
मौजूद समय में चीनी उद्योग अपनी तीन महत्वपूर्ण मांगों पर जोर दे रहा है। उसका कहना है कि लम्बे समय से चीनी के एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य में कोई इजाफा नहीं हुआ है
और यह 3100 रुपए प्रति क्विंटल पर ही स्थिर है जबकि दूसरी ओर गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में प्रति वर्ष हुई बढ़ोत्तरी के कारण चीनी का लागत खर्च बढ़कर 4600 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। इसे देखते हुए चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में अपेक्षित वृद्धि होनी चाहिए।
इसी तरह उद्योग ने गन्ना अवयवों से निर्मित एथनॉल की भागीदारी को 28 प्रतिशत के वर्तमान स्तर से बढ़ाकर 50 प्रतिशत नियत करने की मांग की है
ताकि उद्योग को एथनॉल उत्पादन में अधिक चीनी का उपयोग करने का अवसर प्राप्त हो सके। गन्ना अवयवों से निर्मित एथनॉल का बिक्री मूल्य बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
उद्योग की तीसरी मांग चीनी का निर्यात कोटा बढ़ाने से सम्बन्धित है। फिलहाल सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात की स्वीकृति दी है जबकि उद्योग इसे बढ़ाकर कम से कम 20 लाख टन निर्धारित करने की मांग कर रहा है।
यदि इन तीनों मांगों को स्वीकार कर लिया गया तो चीनी उद्योग को काफी राहत मिल सकती है। फिलहाल चीनी मिलों पर गन्ना उत्पादकों का लम्बा-चौड़ा बकाया मौजूद नहीं है लेकिन यदि सही समय पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो बकाया राशि में भारी वृद्धि सकती है।
