सात कृषि जिंसों में वायदा कारोबार पर रोक की अवधि एक साल के लिए बढ़ी
25-Mar-2025 11:40 AM
मुम्बई। जिंसों में वायदा कारोबार की नियामक संस्था- भारतीय प्रतिभूमि और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 24 मार्च 2025 को एक सर्कुलर जारी करके सात महत्वपूर्ण खाद्य जिंसों में वायदा कारोबार पर दिसम्बर 2021 से लागू प्रतिबंध की समय सीमा को एक बार फिर एक साल के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। इसके फलस्वरूप अब 31 मार्च 2026 तक इन जिंसों में वायदा व्यापार पर रोक लगी रहेगी।
उल्लेखनीय है कि आईग्रेन इंडिया पहले ही इस आशय की खबर दे चुका है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सरकार सात कृषि जिंसों में वायदा कारोबार पर प्रतिबंध की समय सीमा को एक और वर्ष के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक निर्धारित कर सकती है।
उच्च स्तरीय अंतर मंत्रालयी समिति में इस आशय के प्रस्ताव को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है और अब केवल सरकारी आदेश जारी होने का इंतजार है। 24 मार्च को सेबी ने सर्कुलर जारी करके आईग्रेन इंडिया की खबर की पुष्टि कर दी।
सेबी द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि 19 दिसम्बर 2021 को भारतीय प्रतिभूमि एवं विनिमय बोर्ड ने कॉमोडिटी डेरिवेटिव्स संवर्ग में कारोबार का संचालन करने सभी स्टॉक एक्सचेंजों को सात कृषि जिंसों एवं उसके उत्पादों में 20 दिसम्बर 2022 तक वायदा व्यापार को स्थगित रखने का निदेश दिया था।
इसमें गैर बासमती धान, गेहूं, चना, मूंग, सरसों एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पाद (तेल एवं खल), सोयाबीन एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पाद (सोया तेल एवं डीओसी आदि) और क्रूड पाम तेल (सीपीओ) शामिल थे।
सर्कुलर के अनुसार उसके बाद उपरोक्त सात जिंसों में वायदा कारोबार पर रोक की अवधि 20 दिसम्बर 2023, 20 दिसम्बर 2024, 31 जनवरी 2025 और फिर 31 मार्च 2025 तक बढ़ाई गई।
इसकी निरंतरता एक बार फिर बढ़ाने का निर्णय लिया गया है और इसके तहत उपरोक्त सभी सात जिंसों और उसके मूल्य संवर्धित उत्पादों (डेरिवेटिव्स) में वायदा कारोबार पर 31 मार्च 2026 तक के लिए रोक लगा दी गई है।
हालांकि तिलहन-तेल उद्योग को उम्मीद थी कि खासकर सोयाबीन और सरसों को इस दायरे से बाहर कर दिया जाएगा क्योंकि इसका बाजार भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ गया है जिससे किसानों को घाटा हो रहा है मगर यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।
