सोयाबीन उत्पादन की हकीकत पर सरकार और उद्योग का अलग-अलग रुख

22-Mar-2025 04:04 PM

इंदौर। पिछले साल की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन के बिजाई क्षेत्र में कुछ बढ़ोत्तरी हुई थी जिसके आधार पर केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने इसका घरेलू उत्पादन उछलकर 151 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है

लेकिन उद्योग- व्यापार संगठनों का कहना है कि वर्ष 2024 के जुलाई-अगस्त में देश के अनेक भागों में जोरदार वर्षा होने तथा नदियों में उफान आने से भयंकर बाढ़ आ गई थी जिसके प्रकोप से सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई। इस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। सोयाबीन खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल मानी जाती है। 

उद्योग-व्यापार संगठनों का मानना है कि 2024-25 के सीजन में सोयाबीन का घरेलू उत्पादन 120-125 लाख टन से ज्यादा नहीं हुआ और इसलिए सरकार के अगले अनुमान में उत्पादन आंकड़े में कुछ कटौती हो सकती है।

नई फसल की जोरदार आवक होने तथा क्रशिंग-प्रोसेसिंग इकाइयों की मांग कमजोर रहने से सोयाबीन का थोक मंडी भाव आरंभ से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की तुलना में काफी नीचे चल रहा है और निकट भविष्य में नीचे ही रहने की उम्मीद है। 

उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सरकारी एजेंसी- नैफेड द्वारा 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में 20 मार्च 2025 तक किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (4892 रुपए प्रति क्विंटल) पर करीब 14.72 लाख टन सोयाबीन की रिकॉर्ड खरीद की गई।

इसके तहत महाराष्ट्र में सर्वाधिक 8.37 लाख टन, मध्य प्रदेश में 3.89 लाख टन तथा राजस्थान में 99 हजार टन सोयाबीन की खरीद हुई।

इसके अलावा तेलंगाना में 81 हजार टन, गुजरात में 48 हजार टन तथा कर्नाटक में 18 हजार टन से कुछ अधिक सोयाबीन खरीदा गया।

हालांकि सोयाबीन का थोक मंडी भाव अब भी समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहा है मगर उपरोक्त सभी राज्यों में इसकी सरकारी खरीद बंद हो चुकी है। इससे किसानों को औने -पौने दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।