तेल-तिलहन में वायदा कारोबार पर रोक की अवधि बढ़ने से उद्योग एवं किसान निराश

27-Mar-2025 05:30 PM

मुम्बई। नियामक संस्था- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 20 दिसम्बर 2024 को जब सात महत्वपूर्ण कृषि जिंसों एवं उसके मूल्य संवर्धित उत्पादों (डेरिवेटिव्स) में वायदा कारोबार पर रोक की अवधि केवल एक माह के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी तब उद्योग-व्यापार क्षेत्र को लगा कि अब इसे समाप्त कर दिया जाएगा क्योंकि उससे पूर्व प्रतिबंध की समय सीमा में एक-एक साल की बढ़ोत्तरी हो रही थी।

लेकिन 31 जनवरी 2025 को सेबी ने पाबंदी की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2025 तक नियत कर दी। उद्योग- व्यापार क्षेत्र की उम्मीद तब भी कायम रही लेकिन 24 मार्च 2025 को जब सेबी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके गैर बासमती धान, गेहूं,

चना एवं मूंग के साथ-साथ सरसों एवं इसके उत्पादों, सोयाबीन एवं उसके डेरिवेटिव्स तथा क्रूड पाम तेल में भी वायदा कारोबार पर प्रतिबंध की समय सीमा को एक साल के लिए बढ़ाकर 31             

मार्च 2026 नियत करने की घोषणा कर दी तब तेल उद्योग एवं तिलहन उत्पादकों को भारी निराशा हुई। उपरोक्त जिंसों में वायदा कारोबार पर सर्वप्रथम 19 दिसम्बर 2021 को रोक लगाने की घोषणा की थी और तब से यह जारी है। 

सोयाबीन का थोक मंडी भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे आने तथा सरसों की नई फसल की जोरदार आपूर्ति शुरू होने से उद्योग- व्यापार क्षेत्र को उम्मीद थी कि सरकार इसमें वायदा कारोबार पर लगी रोक की अवधि नहीं बढ़ाएगी।

वायदा व्यापार चालू हो जाता तो मूल्य जोखिम की संभावना घट जाती और किसानों को तिलहन बाजार की दशा एवं दिशा की सटीक जानकारी हासिल करने में सहायता प्राप्त होती। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

खाद्य तेल उद्योग को काफी नीचे स्तर के मार्जिन पर कारोबार करने के लिए विवश होना पड़ रहा है और सोयाबीन तथा सरसों उत्पादकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

सरकार पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन तथा मूंगफली की खरीद कर चुकी है और अब सरसों खरीदने की तैयारी कर रही है।

सरकार का व्यापारिक रवैया घरेलू तिलहन-तेल बाजार में असमंजस या दुविधा का आधार बना हुआ है। सरकार के पास तिलहनों का विशाल स्टॉक मौजूद है जिसे देर- स्वेर घरेलू बाजार में उतारा जाएगा जबकि वहां पहले से ही भाव काफी नीचे स्तर पर चल रहा है।