तिलहन उत्पादन में वृद्धि के लिए 'सी' को बजटीय समर्थन मिलने की उम्मीद
21-Jun-2024 03:01 PM
मुम्बई । सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) को उम्मीद है कि आगामी केन्द्रीय आम बजट में सरकार कृषि क्षेत्र की उन्नति-प्रगति और खासकर दलहन-तिलहन के उत्पादन में वृद्धि पर ध्यान केन्द्रित करेगी।
तिलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए पर्याप्त वित्तय सहयोग के साथ "खाद्य तेलों पर पर राष्ट्रीय मिशन" आरंभ किया जा सकता है। स्वदेशी स्रोतों से तिलहनों कि खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाकर विदेशों से इसके आयात पर निर्भरता घटाई जा सकती है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार केन्द्र की नई सरकार ने अपने 100 दिन के एजेंडे में "तिलहन विकास कार्यक्रम" को भी शामिल किया है जिससे प्रतीत होता है कि तिलहन- तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कुछ नई योजनाएं आरंभ की जा सकती है।
स्वयं प्रधानमंत्री ने खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता घटाने के लिए तिलहन उत्पादन बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। वर्तमान समय में खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता बढ़कर 60 प्रतिशत पर पहुंच गई है और इसके आयात पर विशाल धन राशि खर्च होती है।
अध्यक्ष के मुताबिक एसोसिएशन ने एक बजट पूर्व ज्ञापन तैयार किया है जिसमें खासकर रिफाइंड खाद्य तेल स्टीयरिक एसिड, रिफाइंड ग्लिसरीन, सोप नूडल्स तथा साबुन उद्योग द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ओलिन एसिड जैसे तैयार उत्पादों के आयात पर इन्वर्टेड शुल्क संरचना को सही या दुरुस्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
'सी' ने सरकार को डि ऑयल्ड राइस ब्रान के निर्यात पर लागू प्रतिबंध को हटाने और इसके दुरूपयोग को रोकने के लिए इस पर 5 प्रतिशत का जीएसटी लगाने का सुझाव दिया है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 28 जुलाई 2023 को राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। पहले इसकी समय सीमा 31 मार्च 2024 तक नियत की गई थी मगर बाद में इसे 31 जुलाई 2024 तक बढ़ा दिया गया। इससे खासकर बंगाल के उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
