तुवर का घरेलू उत्पादन-36-40 लाख टन के बीच होने का अनुमान
04-Sep-2023 01:11 PM
नई दिल्ली । हालांकि पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान अरहर (तुवर) के बिजाई क्षेत्र में 2.50 लाख हेक्टेयर से अधिक की गिरावट आई है और अगस्त का मौसम भी फसल के लिए प्रतिकूल रहा लेकिन फिर भी सरकार को इसका उत्पादन सामान्य होने की उम्मीद है।
अगस्त के आरंभ में मानसून ब्रेक से पूर्व सरकार ने 2023-24 सीजन के दौरान तुवर का घरेलू उत्पादन 36 से 40 लाख टन के बीच होने का अनुमान लगाया था लेकिन अब इसमें कुछ कटौती की जा सकती है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार देश में 90 प्रतिशत से अधिक तुवर का उत्पादन 48 जिलों में होता है। इसमें आंध्र प्रदेश के अनंतपुर, गुंटूर, कुर्नूल तथा प्रकाशम, गुजरात के भरुच, नर्मदा एवं बड़ोदरा, कर्नाटक एक बगलकोट, बीदर गुलबर्गा, कोप्पल, बीजापुर,
रायचूर एवं यदगीर, बीड, अकोला, अमरावती औरंगाबाद, बुलढाणा, चंद्रपुर, हिंगोली, जलगांव, जालना, लातूर, नागपुर, नांदेड, नंदूरबार, उस्मानाबाद, परभणी, सोलापुर, वर्धा,
वाशिम एवं यवतमाल, तेलंगाना के आदिलाबाद, जोगुलम्बा, महबूबनगर, नारायणपेट, सांगारेड्डी तथा विकास बाद और उत्तर प्रदेश के बांदा, चित्रकूट तथा फतेहपुर जिले शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के कुछ जिलों में तुवर की बिजाई लेट से हुई जबकि मध्य प्रदेश में सही समय पर पूरी हो गई थी। अन्य राज्यों के अधिकांश जिलों में उचित समय पर पूरी हो गई थी।
अन्य राज्यों के अधिकांश जिलों में उचित समय पर अरहर की बिजाई हुई जबकि कुछ जिलों में देर से हुई। अगस्त माह के प्रथम पखवाड़े के दौरन अधिकांश प्रमुख उत्पादक जिलों में वर्षा सामान्य औसत से कम हुई और दूसरे पखवाड़े में भी इसे विशेष सुधार नहीं देखा गया।
प्रथम पखवाड़े तक अधिकांश जिलों में तुवर फसल की हालत सामान्य आंकी गई थी मगर दूसरे पखवाड़े में कमजोर पड़ गई। कुल मिलाकर स्थिति यह बन रही थी कि फसल की हालत पर गहरी नजर रखने की जरूरत थी। अब सितम्बर की वर्षा पर नजर केन्द्रित है।
