दलहन फसलों का क्षेत्रफल 2023 से ज्यादा मगर 2022 से पीछे

16-Jul-2024 06:09 PM

नई दिल्ली । चालू खरीफ सीजन में दलहन फसलों के उत्पादन क्षेत्र में पिछले साल के मुकाबले हुई। 2.80 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी ख़ुशी की बात तो है लेकिन इसके लिए ढोल पीटने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह क्षेत्रफल वर्ष 2022 तथा 2021 की तुलना में काफी पीछे है।

दरअसल वर्ष 2023 में जून माह के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की हालत कमजोर रही थी और दलहन फसलों की बिजाई देर से शुरू हुई थी। इससे कुल क्षेत्रफल में कमी आ गई थी।

लेकिन उससे पूर्व के वर्षों में मानसून की अच्छी वर्षा के सहारे दलहनों का रकबा बढ़ गया था। उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2023 की तुलना में 2024 के दौरान खरीफ कालीन दलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 49.50 लाख हेक्टेयर से उछलकर 62.32 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

इसके तहत अरहर का बिजाई क्षेत्र 9.66 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.14 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का क्षेत्रफल 12.75 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 13.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर मूंग का रकबा 19.57 लाख हेक्टेयर से घटकर 15.79 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।

अन्य दलहन फसलों की बिजाई भी कम क्षेत्रफल में हुई।  इसके मुकाबले वर्ष 2022 के सीजन का आंकड़ा देखने पर पता चलता है कि 15 जुलाई तक खरीफ कालीन दलहनों का कुल उत्पादन क्षेत्र 72.66 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया था

जिसमें अरहर का बिजाई क्षेत्र 25.81 लाख हेक्टेयर, उड़द का क्षेत्रफल 18.06 लाख हेक्टेयर तथा मूंग का रकबा 20.19 लाख हेक्टेयर शामिल था।

अन्य दलहनों की बिजाई भी 8.47 लाख हेक्टेयर में हुई थी। इसी तरह वर्ष 2021 में 15 जुलाई तक खरीफ कालीन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 66.69 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था।

उस समय अरहर (तुवर) का बिजाई क्षेत्र 31.58 लाख हेक्टेयर, उड़द का 15.67 लाख हेक्टेयर तथा मूंग का क्षेत्रफल 15.85 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया था। इस बार तुवर एवं उड़द की अच्छी बिजाई हो रही है मगर मूंग का रकबा पीछे चल रहा है।