धान के 25 प्रतिशत क्षेत्रफल में जलवायु-प्रतिरोधी सीड का उपयोग होने की उम्मीद
16-Jul-2024 05:44 PM
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने चालू खरीफ के दौरान देश में धान के कुल संभावित उत्पादन क्षेत्र के लगभग 25 प्रतिशत भाग में ऐसे बीज का उपयोग करने का लक्ष्य रखा है जो मौसम एवं जलवायु की प्रतिकूल स्थिति को ज्यादा से ज्यादा सहन करने में सक्षम हो।
वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले रबी सीजन के दौरान देश में गेहूं का बम्पर उत्पादन होने का एक प्रमुख कारण यह रहा कि जलवायु-प्रतिरोधी बीज की खेती बड़े पैमाने पर की गई थी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक का कहना है कि 2023-24 के रबी सीजन के दौरान गेहूं के लगभग 75 प्रतिशत उत्पादन क्षेत्र में ऐसे सीड की बिजाई की गई जिसमें प्रतिकूल मौसम को बर्दाश्त करने के क्षमता ज्यादा थी।
इसके फलस्वरूप चालू वर्ष के दौरान गेहूं का घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़कर करीब 11.30 करोड़ टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया।
भारतीय कृषि अनुसंधान क्षेत्र की इस प्रमुख संस्था- आईसीएआर के 96 वें फाऊंडेशन डे (स्थापना दिवस) के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में महानिदेशक ने कहा कि मौसम एवं जलवायु में अनियमित एवं अनियंत्रित बदलाव हो रहे हैं
और इसलिए इसके प्रतिकूल प्रभाव तथा दुष्परिणाम से बचने के लिए ऐसे बीज का उपयोग बढ़ाना आवश्यक है जो उसे अधिक से अधिक समय तक बर्दाश्त करने की शक्ति रखता है।
इस तरह का बीज सूखे को बर्दाश्त कर सकता है। लम्बे समय तक खेतों में जल जमाव का सामना कर सकता है और पौधों के डूबने के बावजूद पुनः खड़ा हो सकता है।
पिछले खरीफ सीजन में 16 प्रतिशत धान के उत्पादन क्षेत्र में इस तरह के बीज का उपयोग किया गया था जबकि चालू खरीफ सीजन में इसका दायरा बढ़ाकर 25 प्रतिशत क्षेत्र तक पहुंचाने का लक्ष्य नियत किया गया है।
