विभिन्न सरकारी प्रयासों के बावजूद गेहूं बाजार में अपेक्षित तेजी नहीं
05-May-2026 04:38 PM
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों में 2585 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की जोरदार खरीद जारी है और सरकार ने प्राइवेट क्षेत्र के लिए इसके निर्यात का द्वार भी खोल दिया है। इसके बावजूद विभिन्न थोक मंडियों में गेहूं का दाम एमएसपी के आसपास या उससे नीचे चल रहा है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश जैसे प्रांतों में कोई खरीद की गति धीमी देखी जा रही है।
सरकार ने पहले 25 लाख टन गेहूं एवं 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी जिसे बाद में दोगुना बड़ा दिया। अब निर्यातक 50 लाख टन गेहूं तथा 10 लाख टन मूल्य संवर्धित गेहूं उत्पादों (आटा, मैदा, सूजी आदि) का शिपमेंट कर सकते हैं। यह सब उपाय गेहूं का मंडी भाव ऊंचा उठाने के लिए किया जा रहा है।
लेकिन उद्योग-व्यापार क्षेत्र इन उपायों के प्रति ज्यादा आशान्वित नहीं है क्योंकि उसे बाजार में सरकार के अकस्मात हस्तक्षेप तथा सरकार की क्षण-क्षण बदलती नीतियों से भारी परेशानी होती रही है। उद्योग-व्यापार क्षेत्र यदि किसानों से ऊंचे दाम पर गेहूं खरीदता है (जिसके लिए सरकार प्रोत्साहित करती है) तो स्वाभाविक रूप से उस गेहूं की बिक्री भी ऊंची कीमतों पर ही होगी।
लेकिन सरकार को यह पसंद नहीं होता और वह तत्काल भंडारण सीमा का आदेश लागू कर देती है। इसी तरह आज 50 लाख टन गेहूं के निर्यात की स्वीकृति दी गई है तो कल अचानक इस पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। इससे निर्यातकों की नैया मझधार में ही डूब सकती है। वर्ष 2022 में कुछ ऐसी ही परिस्थिति बन गई थी।
सरकार को व्यापारियों / निर्यातकों एवं मिलर्स / प्रोसेसर्स को ठोस, स्थायी एवं व्यावहारिक नीति का आश्वासन देना होगा ताकि बाजार के महारथियों को निश्चिंत होकर अपना कारोबार करने का अवसर मिल सके।
