वर्ष 2030-31 तक तिलहनों का उत्पादन 700 लाख टन पर पहुंचाने का लक्ष्य
27-Mar-2025 12:39 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने घरेलू प्रभाग में तिलहन फसलों का सकल उत्पादन 390 लाख टन के वर्तमान स्तर से बढ़ाकर 2030-31 के सीजन तक 700 लाख टन पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है और इसे हासिल करने के उद्देश्य से 10,103.38 करोड़ समय की धनराशि के साथ 'नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स- ऑयल सीड्स (एनएमईओ-ओएस) की लांचिंग की गई है।
केन्द्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री- एन जे बंभनिया के देश में खाद्य तेलों की लगभग 57 प्रतिशत मांग एवं जरूरत को विदेशों से आयात के जरिए पूरा किया जाता है क्योंकि इसका घरेलू उत्पादन इसकी कुल खपत से बहुत कम होता है।
ऑयल एवं ऑयल सीड मिशन की लांचिंग का मुख्य उद्देश्य तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ाना है ताकि स्वदेशी स्रोतों से खाद्य तेलों की आपूर्ति एवं उपलब्धता में अच्छी बढ़ोत्तरी हो और आयात पर निर्भरता घट सके। इसके तहत खासकर सरसों- रेपसीड के उत्पादन संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा सरकार ने नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल- पाम की भी लांचिंग की है जिसके तहत ऑयल पाम की खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे देश को खाद्य तेल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिलेगी।
दक्षिण भारत के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रांतों में पाम के बागानों का विकास-विस्तार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस मिशन के अंतर्गत देश में ऑयल पाम के बागानों का क्षेत्रफल 6.50 लाख हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पर काम तेजी से चल रहा है।
खाद्य राज्य मंत्री के अनुसार देश के तिलहन उत्पादकों के हितों की रक्षा करने तथा उसे सहयोग- समर्थन देने के उद्देश्य से क्रूड एवं रिफाइंड श्रेणी के खाद्य तेलों पर मूल आयात शुल्क में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है जिसमें पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल शामिल है।
क्रूड खाद्य तेलों पर वास्तविक शुल्क बढ़कर 27.5 प्रतिशत और रिफाइंड खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क बढ़कर 37.75 प्रतिशत हो गया है।
