अल नीनो से मानसून एवं कृषि क्षेत्र का समीकरण बिगड़ने की आशंका
18-Jun-2026 03:45 PM
नई दिल्ली। अल नीनो के प्रभाव से इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत असाधारण रूप से धीमी रही है और वर्षा का अभाव आगे भी बरकरार रहने की संभावना है। इससे खरीफ फसलें तथा औद्योगिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
बेशक सरकार के पास चावल तथा गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद है और दलहनों का स्टॉक भी बढ़कर 43 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है लेकिन खरीफ कालीन फसलों का उत्पादन घटने से बाजार पर प्रभाव अवश्य पड़ना चाहिए।
मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष 17 जून तक राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत की तुलना में 40 प्रतिशत कम बारिश हुई। भारत में सर्वाधिक वर्षा जून- सितम्बर की अवधि में सक्रिय रहने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान होती है जो खरीफ फसलों के लिए टॉनिक या ऑक्सीजन का काम करती है। बारिश की कमजोर शुरुआत के कारण देश में धान से लेकर सोयाबीन तक की खेती पर असर पड़ रहा है।
अल नीनो केवल भारत को ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित करेगा जिससे वैश्विक खाद्यान्न संकट बढ़ने की आशंका है।
इससे कई आवश्यक कृषि एवं खाद्य जिंसों की कीमतों में भारी तेजी आ सकती है। अमरीकी मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष का अल नीनो अब तक के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक हो सकता है। जलवायु मॉडल्स से संकेत मिलता है कि भारत के कई भागों में जुलाई-अगस्त के दौरान असाधारण रूप से सूखे का संकट बढ़ सकता है। इसमें पश्चिमोत्तर क्षेत्र तथा मध्यवर्ती संभाग विशेष रूप से सम्मिलित हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक मानसून की हालत एकदम या स्थायी रूप से कमजोर नहीं रहेगी। बीच-बीच में कई क्षेत्रों में वर्षा हो सकती है लेकिन यह देखना आवश्यक होगा कि दो बारिश के बीच में समय का फासला कितना रहता है। भीषण गर्मी के कारण नियमित वर्षा की आवश्यकता पड़ेगी लेकिन उसकी संभावना इस बार कम दिखती है।
