लालमिर्च की खेती में घातक रसायनों का उपयोग रोकने का आग्रह

18-Jun-2026 04:52 PM

गुंटूर। भारतीय लालमिर्च के सबसे प्रमुख खरीदार- चीन में इस महत्वपूर्ण मसालों की खेपों में हानिकारक कीटनाशी रसायन का अवशेष पाए जाने के बाद उसे अस्वीकार कर दिया गया। इसे देखते हुए चिलीज एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने आंध्र प्रदेश सरकार से निर्यातोन्मुखी लालमिर्च की खेती में उच्च जोखिम वाले रसायनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया है।

एसोसिएशन ने आगाह किया है कि यदि लालमिर्च के निर्यात लॉट में इस घातक रसायनों का अवशेष जरूरत से ज्यादा रहा तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारत की साख, प्रतिष्ठा एवं विश्ववसनीयता, को धक्का लग सकता है और खासकर चीन में इसका निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी। पिछले वित्त वर्ष के दौरान इसका निर्यात कुछ घट गया था। 

गत 15 जून को राज्य के कृषि एवं सहकारिता विभाग को दिए गए ज्ञापन में एसोसिएशन ने कहा है कि खासकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं कर्नाटक से वैश्विक बाजार (आयातक देशों) में सूखी लालमिर्च की जो खेप भेजी जाती है उसे वहां अस्वीकार करने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं अथवा उसकी क्वालिटी की जांच-पड़ताल करने में काफी देर हो जाती है।

लालमिर्च के निर्यात मूलक माल के नमूनों में अक्सर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों का अवशेष मान्य या स्वीकृत सीमा से काफी ऊंचा रहने की शिकायतें अक्सर सामने आ रही हैं।

एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में कुछ हानिकारक रसायनों के नाम भी दिए है जिसकी पहचान स्वास्थ्य के लिए घातक कीटनाशक के रूप में की गई है और सरकार से लालमिर्च की खेती में उसके उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह भी किया है। इसमें एसीफेट तथा मेटामिडोफोस रसायन विशेष रूप से चिन्हित किए गए हैं जिसका प्रयोग निर्यात मूलक लालमिर्च के उत्पादन में बंद करने की मांग की गई है। 

निर्यातकों का कहना है कि यह मामला खेतों से निर्यात शिपमेंट तक की श्रृंखला से सम्बन्धित समस्या है इसलिए सरकार को प्रत्येक मोर्चे पर इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत है। इसके तहत गुंटूर, प्रकाशम, पालनाडु, कुर्नूल एवं मांड्या जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए।