अधिक उत्पादन एवं आवक बढ़ने से अजवायन के भाव दबे
16-Apr-2025 06:29 PM
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में समर क्रॉप की आवक बढ़नी शुरू हो गई है। उल्लेखनीय है कि विंटर क्रॉप अधिक होने के पश्चात समर क्रॉप की पैदावार भी गुजरात में अधिक होने के समाचार मिल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र के नंदूरवार लाइन पर अजवायन की फसल विंटर में आती है जबकि गुजरात में फसल विंटर एवं समर दोनों सीजन में आती है। चालू सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश में पैदावार गत वर्ष की तुलना में कम रही है जबकि राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में उत्पादन गत वर्ष के बराबर रहा। नंदूरवार लाइन पर भी उत्पादन गत वर्ष के बराबर माना गया है।
उत्पादन
जानकार सूत्रों का कहना है कि गुजरात में समर क्रॉप की पैदावार गत वर्ष के 3/3.50 लाख बोरी की तुलना में इस वर्ष 6/6.50 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। जबकि विंटर में भी उत्पादन लगभग 1 लाख बोरी का रहा था गत वर्ष विंटर में उत्पादन 70/80 हजार बोरी का रहा था।
आंध्र प्रदेश में दूसरे वर्ष भी पैदावार कम रही। वर्ष 2023 के दौरान आंध्र प्रदेश में अजवायन का उत्पादन 2/2.25 लाख बोरी का रहा था जोकि वर्ष 2024 में घटकर 1.60/1.70 लाख बोरी एवं वर्ष 2025 में 1.40/1.50 लाख बोरी का माना गया है। मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में उत्पादन गत वर्ष के समान 70/80 हजार बोरी का माना गया है। महाराष्ट्र के नंदूरवार लाइन पर उत्पादन 15/20 हजार बोरी होने के समाचार मिले हैं।
आवक
वर्तमान में गुजरात की प्रमुख मंडी जामनगर में नए अजवायन की आवक बढ़कर 4000 बोरी की हो गई है और क्वालिटीनुसार भाव 95/160 रुपए प्रति किलो बोले जा रहे है। ऊंझा मंडी में भी दैनिक आवक 2500/3000 बोरी की हो रही है। आंध्र प्रदेश की करनूल एवं मध्य प्रदेश की नीमच मंडी में आवक 440/500 बोरी की हो रही है। कमजोर मांग एवं क्वालिटी हल्की होने के कारण भाव दबे हुए है।
मंदा-तेजी
बाजार सूत्रों का कहना है कि हाल-फिलहाल कीमतों में अधिक तेजी की संभावना नहीं है। क्योंकि आगामी दिनों में गुजरात की मंडियों में आवक का दबाव बना रहेगा। इसके अलावा अन्य उत्पादक राज्यों की मंडियों में जो भी आवक हो रही है वह माल हल्की क्वालिटी का आ रहा है। जिसके भाव भी मंदे बोले जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि तापमान की अधिकता के कारण गुजरात में क्वालिटी हल्की आने के अनुमान है। सूत्रों का मानना है कि आवक का दबाव कम होने के पश्चात जून-जुलाई माह में भाव बढ़ने के अनुमान है। तब तक भाव सीमित दायरे में बने रहेंगे।
