भारत-अमरीका व्यापार वार्ता के शुरूआती चरण में कृषि उत्पादों को ज्यादा तरजीह
07-Mar-2025 08:35 PM
नई दिल्ली। अमरीका के "जैसे को तैसा" शुल्क संयोजन प्रस्ताव का भारत पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा करने वाली नीति आयोग की एक रिसोर्ट में आश्वस्त तरीके से कहा गया है कि सीमा शुल्क में होने वाला कोई भी बदलाव निश्चित रूप से भारत के पक्ष में होना चाहिए।
एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री फिलहाल अमरीका में है और वहां वाणिज्य मंत्री तथा व्यापार वार्ताकारों के साथ सीमा शुल्क के मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहे हैं।
ट्रम्प प्रशासन पहले ही कह चुका है कि भारत में अमरीकी उत्पादों पर बहुत ऊंचे स्तर का सीमा शुल्क लागू है और इसलिए अमरीका भी भारतीय उत्पादों पर उसी स्तर का आयात शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) लगाएगा।
भारत और अमरीका के बीच आरंभिक दौर की जो व्यापार वार्ता हुई उसमें कृषि एवं खाद्य उत्पादों पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया गया।
जानकारों के मुताबिक सामान्य या प्रचलित अवधारणा के बावजूद यह दोनों देशों के लिए संभव है कि वे आयात शुल्क में कटौती करके तथा गैर शुल्कीय बाधाओं (अड़चनों) को दूर करके एक-दूसरे के बाजार में अपने उत्पादों की अधिक से अधिक पहुंच सुनिश्चित कर सके।
"जैसे को तैसा" आधार पर भी यह हो सकता है। यदि शुल्क के मुद्दे पर व्यापार वार्ता में अच्छी प्रगति नहीं हुई या बातचीत विफल हो गई तो इससे दोनों देशों को नुकसान होगा। अनेक वस्तुओं के मामले में दोनों देश एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक हैं।
इन वस्तुओं के लिये बाजार में अधिक से अधिक पहुंच सुनिश्चित करने का उपाय या तरीका खोजा जाना चाहिए। लेकिन इसके लिए एक-दूसरे के कृषक समुदाय के हितों की रक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इसमें खाद्य तेल, दलहन, ड्राई फ्रूट्स एवं ट्री नट, वनोपज तथा कुछ अन्य उत्पाद सम्मिलित हैं। भारत इन उत्पादों का अमरीका से आयात बढ़ा सकता है और इस पर सीमा शुल्क में कटौती कर सकता है।
अमरीका चाहता है कि भारत ऑटोमोबाइल्स पर आयात शुल्क में कटौती करे। इसके अलावा अमरीका अपने अनेक कृषि उत्पादों के लिए भी भारतीय बाजार में स्थान सुनिश्चित करने के लिए प्रयत्नशील है।
इसके लिए कुछ मामलों में सीमा शुल्क घटाने की जरूरत पड़ेगी जबकि कुछ अन्य मामलों पर गैर शुल्कीय बाधाओं को दूर करना आवश्यक होगा। व्यापार वार्ता अभी जारी रहेगी।
