कमजोर मानसून एवं पश्चिम एशिया संकट से कृषि निर्यात पर असर
20-Apr-2026 01:19 PM
नई दिल्ली। अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने की संभावना है जबकि पश्चिम एशिया में जारी संकट अभी खत्म नहीं हुआ है।
वहां ईरान तथा अमरीका के बीच दोबारा युद्ध शुरू होने की आशंका पैदा हो गई है। होर्मुज स्ट्रेट का जल मार्ग पुनः बंद कर दिया गया है जिससे वहां से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही नहीं हो रही है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष मानसून सीजन (जून-सितम्बर) के दौरान दीर्घकलीन औसत के सापेक्ष केवल 92 प्रतिशत बारिश होने की संभावना व्यक्त की है वर्षा का वितरण भी असमान रह सकता है।
इससे देश के कुछ भागों में भारी बारिश हो सकती है जबकि कुछ अन्य हिस्सों में सूखा पड़ सकता है। खरीफ फसलों के लिए ये दोनों स्थिति अनुकूल नहीं होगी।
उद्योग-व्यापार समीक्षकों का कहना है कि चालू वर्ष के दौरान भारतीय कृषि क्षेत्र में काफी हद तक अनिश्चितता का माहौल कायम रह सकता है। इससे कृषि उत्पादन एवं ग्रामीण क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इसका असर अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा और कृषि उत्पादों के निर्यात में गिरावट आने की आशंका रहेगी। ज्ञात हो कि भारत दुनिया में चावल, मसालों,
ग्वार गम तथा अरंडी तेल आदि का सबसे प्रमुख निर्यातक देश है जबकि कई अन्य कृषि एवं खाद्य उत्पादों के निर्यात में भी संसार के अग्रणी देशों में शामिल है। इस बार मौसम विभाग ने मानसून की वर्षा का जो अनुमान लगाया है यह पिछले करीब 25 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। इससे सरकार की चिंता भी बढ़ गई है।
