जीएसटी से घरेलू एवं वैश्विक बाजार में खाद्य तेल की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी
24-Sep-2025 12:03 PM
मुम्बई। एक अग्रणी उद्योग संस्था- साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अध्यक्ष का कहना है कि केन्द्र सरकार ने जीएसटी के ढांचे को सरल बनाकर लम्बे समय से उद्योग द्वारा की जा रही इस आशय की मांग को पूरा कर दिया है
और इसकी वजह से घरेलू कुछ वैश्विक बाजार में भारतीय खाद्य तेलों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ जाने की उम्मीद है। जीएसटी की दरों में उस संशोधन से ऑयल मील के निर्यात को भी बढ़ावा मिल सकता है।
अध्यक्ष महोदय के मुताबिक सरकार ने वनस्पति तेलों एवं तिलहनों के उनके महत्वपूर्ण सह उत्पादों पर जीएसटी की दर को घटाकर 5 प्रतिशत नियत कर दिया है।
शुल्क ढांचे में हुए इस बदलाव का खाद्य तेल उद्योग के कारोबार पर सकारात्मक असर पड़ेगा। इस अग्रगामी कदम (उपाय) से उद्योग की क्रियाशील पूंजी पर दबाव कम होगा।
उपभोक्ताओं के लिए एफोर्डेबिलिटी में सुधार आएगा, उत्पादों की मांग एवं खपत बढ़ेगी और वैश्विक तथा घरेलू बाजार- दोनों में भारतीय खाद्य तेलों तथा ऑयल मील की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ जाएगी।
इसके साथ-साथ सरकार ने मैन्युफैक्चर्स, पैकर्स तथा आयातकों को उत्पादित (निर्मित) माल तथा विदेशों से आयातित उत्पाद के बिना बिके स्टॉक के लिए उच्चतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में संशोधन- परिवर्तन के लिए 31 मार्च 2026 तक का समय प्रदान किया है।
लेकिन सरकारी आदेश में कहा गया है कि मूल एमआरपी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ना चाहिए और उसमें जो संशोधन होगा उस पर जीएसटी की दर में हुए बदलाव का प्रदर्शन साफ-साफ दिखाना आवश्यक है।
कहने का आशय यह है कि पैकिंग के लेवल पर जीएसटी की दर में परिवर्तन से पूर्व तथा बदलाव के बाद किए गए संशोधन वाला मूल्य अंकित होना जारी है ताकि यह पता चल सके कि कंपनियों ने सरकारी नियम का पूरी तरह पालन किया है।
यदि खाद्य तेल उत्पादन जीएसटी की दर में हुए संशोधन के बाद हुआ है तो उस पर नई दर को अंकित अवश्य किया जाना चाहिए। खाद्य तेल उद्योग एवं उपभोक्ता- दोनों को राहत मिलेगी।
