केवल फसलों की वैधानिक गारंटी से पंजाब में धान का क्षेत्रफल घटाने में मिलेगी सहायता
25-Nov-2024 01:30 PM
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार द्वारा पंजाब एवं हरियाणा में धान एवं गेहूं के सम्पूर्ण विपणन योग्य स्टॉक की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाती है जिससे वहां इन दोनों महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खेती के प्रति किसानों में जबरदस्त उत्साह एवं आकर्षण बरकरार रहता है। पंजाब में पानी के अभाव का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसे देखते हुए सरकार वहां धान के क्षेत्रफल में कटौती कर प्रयास कर रही है मगर इसमें उसे ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है। किसान धान एवं गेहूं की भांति अन्य फसलों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) वैधानिक गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि यही एक मात्रा ऐसा कारगर तरीका हो सकता है जिससे पंजाब में किसानों को धान के बजाए अन्य फसों का रकबा बढ़ाने के लिए प्रेरित- प्रोत्साहित किया जा सकता है।
अब तक वहां धान का क्षेत्रफल घटाने तथा अन्य फसलों का रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से जितनी भी योजनाएं चलाई गई, वे ज्यादा असरदार नहीं रही।
पंजाब-हरियाणा की सीमा पर पिछले अनेक महीनों से किसानों का धरना-प्रदर्शन जारी है। एक अग्रणी किसान नेता का कहना है कि सरकार को इस बारे में गम्भीरतापूर्वक विचार करना की आवश्यकता है कि जब दोनों राज्यों में किसानों को धान एवं गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त हो रहा है तो वे इसकी लीगल गारंटी की मांग क्यों कर रहे हैं।
दरअसल मक्का, दलहन, तिलहन, कपास एवं अन्य मोटे अनाजों का कठिन संघर्ष करना पड़ता है। हालांकि इन फसलों के लिए भी एमएसपी निर्धारित होती है मगर सरकार उसकी खरीद के लिए बाध्य नहीं होती है। यदि लीगल गारंटी लागू होगी तो किसान काफी हद तक निश्चित होकर इन फसलों की खेती पर ध्यान दे सकते हैं।
यह आवश्यक नहीं है कि सम्पूर्ण विपणन योग्य स्टॉक की खरीद सरकार ही करे बल्कि किसानों की पूरक मांग यह भी है कि उद्यमियों-व्यापारियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर इन फसलों की खरीद के लिए आवश्यक व्यवस्था की जानी चाहिए।
अंततः बाजार की शक्तियां ही कीमतों का निर्धारण करती हैं लेकिन कोई भी पक्ष घाटे का सौदा नहीं कर सकता है।
