महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर सोयाबीन एवं कपास उत्पादकों को राहत देने का भारी दबाव

25-Nov-2024 12:22 PM

मुम्बई । महाराष्ट्र में विधान सभा चुनाव के बाद महायुति गठबंधन एक बार फिर सत्ता में आ गया है और जल्दी ही वहां मुख्यमंत्री का नाम घोषित होने वाला है तथा उसके बाद मंत्रिमंडल का गठन भी हो जाएगा।

लेकिन इस सरकार के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण एवं तात्कालिक चुनौतियां मौजूद रहेंगी। इसमें सबसे पहले सोयाबीन तथा कपास के उत्पादकों को राहत देने की चुनौती है क्योंकि इसका भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे आ गया है।  

महाराष्ट्र में विधान सभा चुनाव के लिए मतदान से एक दिन पूर्व यानी 20 नवम्बर को लातूर मंडी में सोयाबीन का भाव लुढ़ककर 4200 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया था जो 4892 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब 14 प्रतिशत नीचे था।

उधर अकोला मंडी में देसी कपास का दाम 7396 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया था जो 7521 रुपए प्रति क्विंटल के एमएसपी से कुछ नीचे था।

इतना ही नहीं बल्कि लासल गांव में प्याज का मूल्य भी पिछले तीन सप्ताहों के अंदर 26 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 19 नवम्बर को 4000 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। 

समझा जाता है कि महाराष्ट्र की एक चुनावी सभा में प्रधानमंत्री ने राज्य में सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6000 रुपए प्रति क्विंटल नियत करने की जो घोषणा की थी वह महायुति गठबंधन के लिए संजीवनी बूटी साबित हुई।

अब किसानों को उम्मीद है कि मंडी भाव चाहे जो भी हो लेकिन सरकार 6000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से सोयाबीन की खरीद अवश्य करेगी। लगातार घटती कीमतों से सोयाबीन के उत्पादक बेहद परेशान और चिंतित हैं।

इसका दाम बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में एकाएक 20 प्रतिशत की भारी बढ़ोत्तरी कर दी थी जिससे खाद्य तेलों का भाव तो उछल गया मगर सोयाबीन के मूल्य पर उसका कोई असर नहीं पड़ा।

अब सरकार के पास दो विकल्प हैं - या तो वह मूल्य समर्थन योजना के तहत महाराष्ट्र में 6000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से सीधे किसानों से सोयाबीन की खरीद करे या फिर भावान्तर भुगतान योजना को प्रभावी ढंग से लागू करे। इससे किसानों को राहत मिलेगी और सरकार के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा। 

केन्द्र के समक्ष इससे मिलती-जुलती एक और चुनौती आएगी। यदि महाराष्ट्र में 6000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से सोयाबीन की सरकारी खरीद होती है तो मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में भी इसकी जोरदार मांग उठेगी क्योंकि वहां भी दाम घटकर काफी नीचे आ गया है।