मैक्सिको तथा कनाडा के साथ अमरीका के शुल्क युद्ध से भारतीय चावल को फायदा होने के आसार
06-Mar-2025 07:40 PM
हैदराबाद। हालांकि सीमा शुल्क के मामले में अमरीकी राष्ट्रपति की "जैसे को तैसा" वाली नीति ने पूरी दुनिया को चक्कर में डाल दिया है लेकिन इससे भारत को एक अनचाहा अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है।
अमरीका ने अपने दो पड़ोसी देश- मैक्सिको तथा कनाडा से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 2.5 प्रतिशत की दर से सीमा शुल्क लगा दिया है।
अब बदले की कार्रवाई के तहत ये दोनों देश भी अमरीकी उत्पादों पर टैक्स बढ़ा सकते हैं। इससे भारत को परोक्ष रूप से फायदा हो सकता है। कनाडा तथा मैक्सिको सहित इन देशों में भारत को चावल का निर्यात बढ़ाने का अवसर मिल सकता है जो देश अभी तक अमरीका से इसका आयात करते रहे हैं।
नई शुल्क नीति से अमरीका के चावल निर्यात पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। इससे भारत के लिए अच्छा अवसर उत्पन्न हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि अमरीका से मैक्सिको एवं कनाडा के साथ-साथ जापान, कैरेबियाई क्षेत्र, खाड़ी क्षेत्र के देश, उत्तरी अमरीका महाद्वीप के अनेक मध्यवर्ती देश तथा दक्षिण अमरीका महाद्वीप के देशों में भी चावल का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है।
अमरीका से मैक्सिको को 6.38 लाख टन तथा कनाडा को करीब 2.50 लाख टन चावल भेजा जाता है। ये दो ऐसे पड़ोसी देश हैं जो अमरीका की नई शुल्क नीति से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले है।
एक भारतीय चावल निर्यातक का कहना है कि यद्यपि आमतौर पर सीमा शुल्क का नकारात्मक असर पड़ता है लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प की नीति भारतीय चावल के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
कनाडा तथा मैक्सिको को भारत से चावल का आयात बड़ा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि ये दोनों देश चावल सहित अमरीका के अन्य कृषि एवं खाद्य उत्पादों के बहुत बड़े खरीदार हैं।
यदि सीमा शुल्क के कारण अमरीकी चावल काफी महंगा हो जाता है तो कनाडा और मैक्सिको एशियाई देशों से इसके आयात पर जोर दे सकते हैं।
इससे भारत के साथ-साथ पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देशों को भी फायदा हो सकता है। भारतीय चावल सबसे सस्ते दाम पर उपलब्ध रहता है इसलिए इसका निर्यात ज्यादा हो सकता है।
अमरीका में यदि भारतीय बासमती चावल पर आयात शुल्क बढ़ाया जाता है तब भी इसकी मांग ज्यादा प्रभावित नहीं होगी क्योंकि वहां इस चावल का उपयोग मुख्यतः समृद्ध वर्ग के लोग करते हैं। भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक एवं दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
