मानसून के बाद उत्तरी एवं पश्चिमी राज्यों में वर्षा का अभाव
25-Nov-2024 07:41 PM
नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम मानसून का सीजन समाप्त होने के बाद देश के उत्तरी, पश्चिमी, मध्यवर्ती एवं पश्चिमोत्तर भाग में बारिश का अभाव देखा जा रहा है मगर दक्षिण भारत के कुछ प्रांतों एवं पूर्वी तथा पूर्वोत्तर राज्यों में अच्छी वर्षा हुई है। दक्षिणी प्रायद्वीप में खासकर तमिलनाडु,केरल और तटीय आंध्र प्रदेश में वर्षा का दौर अभी जारी है।
बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दाब के क्षेत्र के प्रकोप तथा उत्तर-पूर्व मानसून की सक्रियता से इस भाग में बारिश हो रही है। राष्ट्रीय स्तर पर 155 बांधों-जलाशयों में पिछले सप्ताह कुल भंडारण क्षमता के सापेक्ष केवल 83 प्रतिशत पानी का भंडार बचा हुआ था।
मौसम विभाग के मुताबिक 1 अक्टूबर से 21 नवम्बर 2024 के बीच देश के 720 जिलों में से 64 प्रतिशत जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई जबकि उससे पूर्व दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में 1 जून से 30 सितम्बर के दौरान 8 प्रतिशत अधिशेष बारिश हुई थी।
राष्ट्रीय स्तर पर 21 नवम्बर तक सामान्य औसत से 11 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई जिसका प्रमुख कारण पश्चिमोत्तर भाग में 75 प्रतिशत कम वर्षा होना रहा।
वहां जलाशयों में पानी का स्तर भी नीचे आने लगा है। दूसरी ओर इस अवधि के दौरान केवल पूर्वी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में सामान्य से अधिक वर्षा हुई। बारिश की कमी मध्यवर्ती क्षेत्र में 18 प्रतिशत तथा दक्षिणी क्षेत्र में 2 प्रतिशत दर्ज की गई।
दक्षिणी क्षेत्र में कर्नाटक तथा तेलंगाना के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के अधिकांश भागों एवं उड़ीसा में बारिश कम हुई। तमिलनाडु, केरल एवं पांडीचेरी में भारी वर्षा होने से कुल बारिश की कमी 2 प्रतिशत तक सीमित रही।
अधिकांश राज्यों में रबी कालीन फसलों की बिजाई शुरू हो गई है और इसका रकबा निरंतर बढ़ता जा रहा है। इस बार किसानों द्वारा गेहूं तथा चना के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी किए जाने की उम्मीद है।
