मार्च का मौसम अनुकूल रहने पर गेहूं का हो सकता है शानदार उत्पादन

07-Mar-2025 05:24 PM

नई दिल्ली। पश्चिमोत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों में नई बर्फबारी होने के कारण मैदानी इलाकों में मौसम कुछ ठंडा हो गया है जो रबी फसलों और खासकर गेहूं के लिए लाभदायक साबित हो रहा है।

वैसे कई क्षेत्रों में तापमान ऊंचा होने लगा है और गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। इस बार गेहूं के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है और धूप तथा गर्मी को ज्यादा सहने की क्षमता वाली किस्मों की खेती अधिक क्षेत्रफल में हुई है।

फरवरी में तापमान सामान्य औसत से कुछ ऊंचा रहा लेकिन यदि मार्च का मौसम संतोषजनक बना रहा तो वर्ष 2025 के दौरान देश में गेहूं का शानदार उत्पादन हो सकता है। इससे घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ेगी। 

जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड जैसे राज्यों में हाल के दिनों में हुए हिमपात से पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान आदि में मौसम कुछ ठंडा हुआ है। इससे पूर्व फरवरी का महीना पिछले 125 वर्षों में सबसे गर्म  आंका गया।

फरवरी तक मौसम आमतौर पर ठंडा रहता है लेकिन पिछले दो-तीन साल से काफी गर्म देखा जा रहा है। हालांकि मौसम विभाग ने देश के अधिकांश भागों में मार्च-अप्रैल के दौरान उच्चतम एवं न्यूनतम तापमान सामान्य औसत से ऊंचा रहने का अनुमान व्यक्त किया है

लेकिन कम से कम मार्च के पहले सप्ताह में गर्मी जरूरत से ज्यादा नहीं देखी गई। इससे गेहूं की फसल को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। 

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 15-20 दिनों तक यदि तापमान में असाधारण बढ़ोत्तरी नहीं हुई और प्रमुख उत्पादक इलाकों में एक-दो बौछार पड़ गई तो गेहूं की फसल के लिए खतरा समाप्त हो सकता है और बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ जाएगी।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के रबी सीजन के लिए 1150 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया  है जो 2023-24 सीजन के अंतिम समीक्षित उत्पादन 1132.90 लाख टन से करीब 17 लाख टन ज्यादा है।

इधर उद्योग-व्यापार क्षेत्र का मानना है कि चालू सीजन के दौरान गेहूं का उत्पादन 1095-1100 लाख टन के बीच हो सकता है जो 2023-24 सीजन की तुलना में करीब 8 प्रतिशत ज्यादा है।