मौसम की प्रतिकूल स्थिति से प्रभावित होता है दलहनों का उत्पादन
16-Apr-2025 07:41 PM
विजयवाड़ा। भारत में खरीफ, रबी एवं जायद सीजन को मिलाकर अत्यन्त विशाल क्षेत्र में विभिन्न दलहन फसलों- चना, तुवर, उड़द, मूंग, मसूर एवं मटर आदि की खेती होती है लेकिन औसत ऊपर दर वाली नीचे रहने के कारण इसका वास्तविक उत्पादन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाता है
और घरेलू मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर को पाटने के लिए विदेशों से भारी मात्रा में दलहनों का आयात करना पड़ता है। उस पर विशाल बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च होती है और राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था में संकुचन पैदा होता है।
भारत में मुख्यतः म्यांमार से उड़द एवं तुवर, ऑस्ट्रेलिया एवं कनाडा से मसूर, रूस और कनाडा से मटर तथा ऑस्ट्रेलिया एवं तंजानिया से देसी चना का आयात किया जाता है।
हालांकि भारत दुनिया में दलहनों का सबसे प्रमुख उत्पादक देश है मगर फिर भी इसे विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि कुल उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने में सक्षम नहीं रहता है।
विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से दलहनों का उत्पादन प्रभावित होता है। कुछ वर्ष पूर्व तक देश में दलहनों की खेती ऐसे क्षेत्रों में ज्यादा होती थी जो पूरी तरह आसमानी बारिश पर निर्भर थी।
इसके अलावा कम उपजाऊ जमीन में दलहनों की बिजाई को प्राथमिकता दी जाती थी क्योंकि किसानों को आकर्षक एवं लाभप्रद वापसी हासिल नहीं हो रही थी।
अब परिदृश्य में कुछ सुधार आया है। वर्ष 2023 एवं 2024 में दलहनों का घरेलू बाजार भाव ऊंचा रहा और इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी अच्छी बढ़ोत्तरी की गई।
लेकिन वर्ष 2025 में एक बार फिर दलहनों का बाजार डावांडोल होने लगा है जिससे सरकार को इसकी खरीद में सक्रियता दिखानी पड़ रही है।
जल्दी ही खरीफ कालीन दलहन फसलों की बिजाई आरंभ होने वाली है जबकि तुवर, उड़द एवं मूंग का भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है। रबी सीजन के दलहनों-चना एवं मसूर की कीमतों में भी शीर्ष स्तर के मुकाबले काफी गिरावट आई है।
