मध्य भारत में बारिश की संभावना से खरीफ फसलें हो सकती हैं प्रभावित
22-Sep-2025 08:50 PM
नई दिल्ली। दक्षिण पश्चिम मानसून की वापसी यात्रा 14 सितम्बर से आरंभ हो चुकी है मगर देश के अंदर बारिश की गतिशीलता अब भी बरकरार है। पिछले सप्ताह के भटिंडा, फतेहाबाद, भिवानी, अजमेर, डीसा एवं भुज (कच्छ) से होकर गुजर रहा था
लेकिन मौसम विभाग ने कहा था कि इसे पूरब से आने वाले ट्रफ के प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है और इसके पारम्परिक मिलान से देश के मध्यवर्ती तथा उत्तरी प्रायद्वीपीय क्षेत्र यानी उड़ीसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में 25 सितम्बर से 1 अक्टूबर के बीच कहीं सामान्य तो कहीं घनघोर वर्षा हो सकती है।
यदि मौसम विभाग का यह अनुमान सही साबित होता है तो सामान्य वर्षा वाले क्षेत्रों में पिछैती बिजाई वाली खरीफ फसलों को फायदा हो सकता है लेकिन अत्यन्त मूसलाधार वाले इलाकों में खेतों में पानी का जमाव होने से परिपक्वता के चरण में पहुंच चुकी अगैती बिजाई वाली फसलों को क्षति होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
महाराष्ट्र में अधिशेष वर्षा एवं बाढ़ के कारण पहले ही 17-18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचने की सूचना आ चुकी है। पंजाब, राजस्थान एवं गुजरात में भी कई इलाकों में बाढ़ का गंभीर प्रकोप देखा गया। मध्य प्रदेश में बाढ़ की विभीषिका अपेक्षाकृत कम रही।
मौसम विभाग ने कहा है कि राजस्थान और गुजरात के जिन इलाकों से मानसून प्रस्थान कर चुका है वहां भी 25 सितम्बर से 1 अक्टूबर के बीच बारिश हो सकती है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि राजस्थान के अधिकांश भाग में इस बार मानसून की बारिश सामान्य औसत से काफी अधिक हुई मगर फिर भी अब वहां कुछ क्षेत्रों में तापमान 38-40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के कारण खेतों की मिटटी सूखने लगी है और लेट बिजाई वाली फसलों को वर्षा की जरूरत महसूस हो रही है।
मौसम विभाग के मुताबिक उपरोक्त राज्यों में चालू माह के अंतिम सप्ताह के दौरान मानसूनी वर्षा का प्रभाव रह सकता है। इसके तहत मध्यवर्ती एवं प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से अधिक वर्षा तथा पश्चिमोत्तर एवं पूर्वी भारत के अधिकांश इलाकों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना है जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य औसत से कम बारिश होने का अनुमान है।
