पीली मटर आयात पर नई अधिसूचनाएं: क्या बदला और व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?
08-Mar-2025 09:00 AM
पीली मटर आयात पर नई अधिसूचनाएं: क्या बदला और व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?
शुल्क-मुक्त आयात की समयसीमा नहीं बढ़ी, लेकिन कुछ खेपों को राहत
भारत सरकार ने पीली मटर (Yellow Peas) के शुल्क-मुक्त आयात की सामान्य अनुमति को आगे नहीं बढ़ाया है, लेकिन पहले से लोड की गई खेपों को सीमित अवधि तक छूट दी गई है।
~~~~~~~~
DGFT अधिसूचना 43/2024-25 (दिनांक: 24 दिसंबर 2024)
विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने इस अधिसूचना में स्पष्ट किया कि:
- पीली मटर (ITC(HS) कोड 07131010) का आयात बिना न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) और पोर्ट प्रतिबंधों के स्वीकृत रहेगा,
- यदि बिल ऑफ लोडिंग (BL) 28 फरवरी 2025 या उससे पहले जारी किया गया हो।
- यानी, 28 फरवरी 2025 तक लोड की गई खेपों पर यह नियम लागू होगा।
~~~~~~~~
कस्टम्स अधिसूचना 17/2025-Customs (दिनांक: 7 मार्च 2025)
वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) ने इस अधिसूचना के जरिए स्पष्ट किया कि:
- 28 फरवरी 2025 से पहले लोड की गई खेपों को 31 मई 2025 तक भारत पहुंचने पर शून्य सीमा शुल्क का लाभ मिलेगा।
- 31 मई 2025 के बाद आने वाली खेपों पर सीमा शुल्क लागू हो सकता है, भले ही वे पहले लोड की गई हों।
~~~~~~~~
व्यापार पर प्रभाव:
- नई खेपों का शुल्क-मुक्त आयात संभव नहीं: सरकार ने पीली मटर के नए शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति को आगे नहीं बढ़ाया है।
- पुरानी खेपों को सीमित राहत: यदि किसी व्यापारी ने 28 फरवरी 2025 से पहले पीली मटर लोड करा ली थी, तो वह खेप 31 मई 2025 तक भारत पहुंचने पर शून्य शुल्क के तहत आएगी।
- 31 मई 2025 के बाद पहुंचने वाली खेपों पर शुल्क लगेगा: भले ही वे पहले लोड की गई हों।
~~~~~~~~
व्यापारियों को क्या करना चाहिए?
- यदि आपके पास 28 फरवरी 2025 से पहले लोड की गई खेप है, तो इसे 31 मई 2025 तक भारत पहुंचाने की योजना बनाएं ताकि आप शुल्क-मुक्त लाभ ले सकें।
- नई खेप के आयात पर सावधानी बरतें, क्योंकि अब शुल्क-मुक्त आयात की सामान्य अनुमति नहीं है।
- आयात नीति और सीमा शुल्क को लेकर सरकारी अधिकारियों या कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लें ताकि कोई वित्तीय नुकसान न हो।
~~~~~~~~
निष्कर्ष:
सरकार ने पीली मटर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति को आगे नहीं बढ़ाया है, लेकिन व्यापारियों को राहत देने के लिए पहले से लोड की गई खेपों को 31 मई 2025 तक छूट दी है।
