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23-Oct-2026 04:44 PM
नई दिल्ली। खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी में देर होने तथा कुछ क्षेत्रों में खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद नहीं रहने से रबी कालीन फसलों की बिजाई धीमी गति से हो रही है। हालांकि सरसों एवं चना सहित कुछ अन्य खरीफ फसलों का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है जिससे किसानों को आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है लेकिन कुछ इलाकों में बिजाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं है।
रबी फसलों की बिजाई के लिए अभी पर्याप्त समय बाकी है इसलिए फिलहाल घबराने या चिंता करने की जरूरत नहीं है लेकिन अल नीनो मौसम चक्र जिस तरह मजबूत और शक्तिशाली होता जा रहा है उससे चिंता कुछ बढ़ सकती है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले सप्ताह तक रबी फसलों का सकल घरेलू उत्पादन क्षेत्र 3.43 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 4.65 लाख हेक्टेयर से 26 प्रतिशत कम रहा। इसके तहत रबी कालीन धान का क्षेत्रफल 1.34 लाख हेक्टेयर से घटकर 88 हजार हेक्टेयर रह गया। इसी तरह तिलहन फसलों का रकबा भी 3.11 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.29 लाख हेक्टेयर रह गया।
दूसरी ओर इसी अवधि में दलहनों का उत्पादन क्षेत्र 10 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 15 हजार हेक्टेयर तथा मोटे अनाजों का रकबा 10 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 11 हजार हेक्टेयर हो गया। चना का रकबा 6 हजार हेक्टेयर रहा जबकि गत वर्ष इस समय तक उसकी बिजाई शुरू नहीं हुई थी।