राइस ब्रान एक्सट्रैक्टर्स के निर्यात पर लगी रोक को हटाने की जोरदार मांग
16-Apr-2025 04:38 PM
मुम्बई। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र की एक अग्रणी संस्था- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने एक बार फिर केन्द्र सरकार से राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन या डि ऑयल्ड राइस ब्रान (डीओआरबी) के निर्यात पर लगी रोक को हटाने का आग्रह किया है।
एसोसिएशन द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस्तेमाल होने वाले एक प्रमुख अवयव- डिऑयल्ड राइस ब्रान के निर्यात पर 28 जुलाई 2023 को प्रतिबंध लगाया गया था और फिर बार-बार इसकी समय सीमा बढ़ाई जाती रही।
सबसे हाल में फरवरी 2025 में इसकी अवधि को 30 सितम्बर 2025 तक बढ़ाने की घोषणा हुई। केन्द्र सरकार सभी किस्मों एवं श्रेणियों के चावल को निर्यात नियंत्रणों से पहले ही मुक्त कर चुकी है और अब केवल राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के शिपमेंट पर ही पाबन्दी लगी हुई है।
इससे पूर्व भी एसोसिएशन ने व्यापक स्तर पर आर्थिक, कृषिगत तथा पर्यावरणीय फायदों का हवाला देकर सरकार से डीओआरबी के निर्यात को प्रतिबंध से मुक्त करने का कई बार आग्रह किया था और उसे ज्ञापन तथा पत्र भी भेजकर अपने निर्णय पर दोबारा विचार करने के लिए कहा था।
एसोसिएशन ने कहा था कि राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन का उत्पादन बढ़ने एवं खपत कम होने से मिलर्स के पास इसका विशाल स्टॉक जमा हो गया है और दाम भी काफी घट गया है।
इससे मिलर्स को भारी नुकसान हो रहा है। मिलर्स को उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करने में कठिनाई हो रही है और राइस ब्रान तेल के निर्बाध उत्पादन में अड़चन आ रही है।
यह मामला खासकर पूर्वी राज्यों के मिलर्स के लिए काफी गंभीर बना हुआ है। पश्चिम बंगाल और उड़ीसा जैसे राज्यों के मिलर्स की आमदनी घटती जा रही है।
जबकि चावल के साथ-साथ सभी तरह के ऑयल मील का निर्यात पूरी तरह खुला हुआ है तब सिर्फ डीओआरबी के शिपमेंट पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है।
पशु आहार निर्माण में डीडीजीएस का उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसे देखते हुए सरकार को राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात पर लागू प्रतिबंध को जल्दी से जल्दी हटाने का निर्णय लेना चाहिए।
