सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 5 प्रतिशत घटने का सोपा का अनुमान

01-Jul-2025 04:34 PM

इंदौर। एक अग्रणी उद्योग संस्था- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन के उत्पादन क्षेत्र में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना व्यक्त की है जिसका कारण यह है कि अनेक किसान इस बार सोयाबीन के बजाए अन्य वैकल्पिक फसलों जैसे- मक्का, अरहर (तुवर) एवं कपास आदि की खेती को प्राथमिकता दे सकता हैं।

2024-25 के मार्केटिंग सीजन में रिकॉर्ड सरकारी खरीद होने के बावजूद सोयाबीन का थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे रहा और किसानों को आकर्षक आमदनी प्राप्त नहीं हुई। 

सोपा के कार्यकारी निदेशक के अनुसार सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र कुल मिलाकर करीब 5 प्रतिशत घट सकता है लेकिन क्षेत्रफल का बेहतर अनुमान बिजाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा। सोपा के मुताबिक पिछले साल देश में 117.48 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती हुई थी। 

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं कर्नाटक जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों के अलावा अन्य राज्यों में भी सोयाबीन की बिजाई अभी जारी है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि राष्ट्रीय स्तर पर इस महत्वपूर्ण तिलहन का उत्पादन क्षेत्र अब गत वर्ष से आगे निकल गया है जबकि पहले यह पीछे चल रहा था।

सोपा के अनुसार चालू वर्ष के दौरान देश में 30 जून तक सोयाबीन का क्षेत्रफल 43 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंच चुका था। इस बार मानसून नियत समय से पहले आ गया और इससे किसानों  को सोयाबीन की बिजाई जल्दी शुरू करने का अवसर मिल गया।

सभी उत्पादक राज्यों में बिजाई की प्रक्रिया जोर-शोर से जारी है और मोटे तौर पर 15 जुलाई तक बिजाई का अभियान जारी रहने की उम्मीद है। इन दो सप्ताहों में ही इसकी बिजाई लगभग पूरी हो जाएगी और इसके बाद छिटपुट रूप से कहीं-कहीं बिजाई हो सकती है। 

सोपा के मुताबिक इस वर्ष जून के अंत तक सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र महाराष्ट्र में 18.40 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 15.40 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 3.70 लाख हेक्टेयर, कर्नाटक में 2.78 लाख हेक्टेयर और तेलंगाना में 1.46 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश के कुछ भागों में सोयाबीन के बीज में अंकुरण नहीं या नगण्य हुआ जिससे वहां इसकी दोबारा बिजाई की जरूरत पड़ेगी। सोपा के मुताबिक 2024-25 सीजन के दौरान 1064 किलो प्रति हेक्टेयर की औसत उपज दर के साथ 125 लाख टन सोयाबीन का घरेलू उत्पादन हुआ था।                            

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