शक्तिशाली अल नीनो से वैश्विक कृषि उत्पादन बाजार होगा प्रभावित
18-Jun-2026 07:49 PM
न्यूयार्क। वैश्विक स्तर पर मौसम वैज्ञानिक चालू वर्ष की दूसरी छमाही में अल नीनो मौसम चक्र की शक्ति, गतिशीलता एवं तीव्रता काफी बढ़ने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं जिससे दुनिया के विभिन्न भागों में तापमान बढ़ सकता है। वर्षा की गति बाधित हो सकती है और कृषि खतरा बढ़ सकता है। इसकी शुरुआत होने के संकेत मिलने लगे हैं।
व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि अल नीनो मौसम चक्र से भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में कृषि उत्पादन पर गहरा असर पड़ सकता है और खासकर दक्षिण एशिया तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में सूखे का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। दूसरी ओर दक्षिण अमरीका महाद्वीप के दक्षिणी भाग तथा संयुक्त राज्य अमरीका में अत्यन्त मूसलाधार वर्षा हो सकती है जिससे वहां भयंकर बाढ़ आने की आशंका रहेगी। दोनों ही मौसमी परिस्थितियां कृषि फसलों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती हैं।
अमरीकी जलवायु पूर्वानुमान केन्द्र पिछले सप्ताह ही अल नीनो के आने की घोषणा कर चुका है उसका कहना है कि यह मौसम चक्र इस बार लगातार सघन तथा मजबूत होता जाएगा और इसके 'सुपर अल नीनो' बनने के 63 प्रतिशत आसार हैं। वर्ष 2027 तक इसका प्रभाव रह सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति निराशाजनक मानी जा सकती है क्योंकि जून से सितम्बर 2026 तक खरीफ फसलों की खेती होगी जबकि अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान रबी फसलों की बिजाई जारी रहेगी। अल नीनो मौसम चक्र का जोरदार प्रभाव भी इसी अवधि में रहेगा।
कई देशों में किसानों की रासायनिक उर्वरकों के अभाव की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। हालांकि अमरीका- ईरान युद्ध बंद हो गया है, दोनों देशों के बीच शांति समझौता (पीस डील) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की उम्मीद बढ़ गई है जिससे खासकर भारत जैसे देशों को राहत मिल सकती है क्योंकि बिजाई का सीजन लम्बा होता है।
अल नीनो एवं प्रतिकूल मौसम के कारण जिन खास जिंसों के वैश्विक बाजार मूल्य पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना है उसमें कोकोआ, कॉफी चीनी तथा पाम तेल आदि शामिल हैं। कुछ मसालों तथा अनाजों का उत्पादन भी प्रभावित होगा जिससे उसकी कीमतों में तेजी आ सकती है।
