दीर्घकालीन औसत के मुकाबले 90 प्रतिशत से भी कम वर्षा होने का अनुमान
23-Jun-2026 02:46 PM
मुंबई। हालांकि भारतीय मौसम विज्ञानं विभाग (आईएसडी) ने इस वर्ष दक्षिणी-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान जून से सितंबर के चार माह की अवधि में दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के सापेक्ष राष्ट्रिय स्तर पर 90 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान व्यक्त किया है लेकिन एक प्राइवेट मौसम एजेंसी का कहना है कि वास्तविक बारिश 90 प्रतिशत से कम हो सकती है।
मौसम एजेंसी के अनुसार अल नीनो मौसम चक्र के बाद अगले वर्ष आमतौर पर ला नीना मौसम चक्र का प्रभाव रहता है जो काफी हद तक मानसून का हितैषी माना जाता है इसके फलस्वरूप वर्ष 2027 में बारिश की स्थिति सामान्य या बेहतर रह सकती है मानसून सीजन के दूसरे हाफ यानि अगस्त 2026 में हिंदमहासागर का डासपोल धनात्क हो सकता है वैसे भी जून की तुलना में जुलाई माह के दौरान बारिश की स्थिति काफी अच्छी रहने की उम्मीद है लेकिन मध्य अगस्त से सूखे का माहौल बनना शुरू हो सकता है जिससे खरीफ फसलों के लिए जोखिम तथा आगामी रबी सीजन फसलों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अलनीनो की वजह से इंडोनेशिया, मलेशिया तथा थाईलैंड जैसे देशो में पाम तेल का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है जहां तक गन्ना एवं चीनी की बात है तो भारत में इसका उत्पादन घटने की संभावना है इसलिए एथनॉल निर्माण में इसके उपयोग पर संदेह बना रहेगा लेकिन मक्का का उपयोग बढ़कर 170 लाख टन पहुंच सकता है।
