उत्तरी क्षेत्र में कपास की पैदावार एवं सरकारी खरीद में गिरावट
07-Apr-2025 05:35 PM
भटिंडा। उत्तरी क्षेत्र के तीनों प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों- राजस्थान, हरियाणा तथा पंजाब में रूई के उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों से गिरावट का रुख देखा जा रहा है और इसकी सरकारी खरीद में भी कमी आई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर कपास का उत्पादन 2019-20 सीजन के 365 लाख गांठ से घटकर 2023-24 के सीजन में 325 लाख गांठ रह गया जबकि 2024-25 के वर्तमान सीजन में यह और भी गिरकर 294 लाख गांठ पर सिमट जाने का अनुमान है। कपास की प्रत्येक गांठ 170 किलो की होती है।
केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कपास की खरीद की जाती है।
2019-20 के मार्केटिंग सीजन में कपास की सरकारी खरीद उछलकर 124.61 लाख गांठ के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी जो 2023-24 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में घटकर 32.84 लाख गांठ पर अटक गई। वैसे 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में यह बढ़कर 100 लाख गांठ पर पहुंच गई है और कहीं-कहीं खरीद जारी है।
उत्तरी क्षेत्र में कपास के उत्पादन का प्रदर्शन कमजोर पड़ता जा रहा है और उसके अनुरूप इसकी सरकारी खरीद में भी कमी आ रही है।
पिछले दो सीजन के दौरान कपास का घरेलू बाजार भाव सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा था इसलिए सीसीआई को इसकी खरीद में ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी।
चालू मार्केटिंग सीजन में भाव नरम रहने से निगम की खरीदारी काफी बढ़ गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कपास का घरेलू उत्पादन 2019-20 में 365 लाख गांठ, 2020-21 में 352.48 लाख, 2021-22 में 311.17 लाख, 2022-23 में 336 लाख, 2023-24 में 325.22 लाख तथा 2024-25 के वर्तमान सीजन में 294 लाख गांठ आंका गया। पंजाब में कपास का बिजाई क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है।
