यूरोपीय संघ ने सिंध प्रान्त को बासमती उत्पादक की मान्यता दी
23-Sep-2025 06:15 PM
ब्रुसेल्स। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में उत्पादित लम्बे दाने वाले सुगन्धित चावल को न केवल बासमती की मान्यता दी है बल्कि इसके आयात को स्वीकार करने की घोषणा भी की है।
यूरोपीय संघ का यह निर्णय भारत के लिए जबरदस्त आघात एवं तगड़ा झटका है। ऐसा प्रतीत होता है कि बासमती चावल के भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग के लिए जो विवाद चल रहा है उसमें यूरोपीय संघ अब पाकिस्तान का पक्ष ले रहा है।
उसका लक्ष्य चाहे जो भी हो (जिसमें रूस से भारत की बढ़ती निकटता भी शामिल है) लेकिन यह भारतीय बासमती चावल उद्योग के लिए अशुभ समाचार है।
यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में उत्पादित 'सुपर बासमती कर्नेल' नामक सफेद बासमती चावल का आयात करने की अनुमति अपने एक सदस्य देश- पौलेंड को करने की दी है।
इसके साथ ही उसने सिंध प्रान्त में उत्पादित लम्बे दाने वाले खुशबूदार चावल को बासमती की मान्यता भी प्रदान कर दी है। पाकिस्तान ने यूरोपीय संघ में बासमती चावल के जीआई टैग के लिए जो आवेदन कर रखा है उसके नए प्रकाशन में अब सिंध के चावल को भी शामिल कर लिया गया है।
यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान के साथ भारत का सम्बन्ध सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में भारत के त्वरित अभियान के दौर में पाकिस्तान को विदेशों से सपोर्ट मिल रहा है।
एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार यूरोपीय आयोग द्वारा 23 सितम्बर 2003 को जारी एक रेग्युलेशन में कहा गया था कि बासमती चावल भारत और पाकिस्तान में गंगा-सिंधु के मैदानी भाग में उत्पादित होता है।
इसका उत्पादन कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में किया जाता है जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश मुख्य रूप से शामिल हैं। यूरोपीय संघ में आयात शुल्क से छूट चावल की किन किस्मों को प्रदान की जाएगी, इसकी जानकारी देने के लिए विनियमन को अधिसूचित किया गया था।
फेडरेशन ऑफ यूरोपियन राइस मिलर्स ने अपने 'यूरोप कोड ऑफ प्रैक्टिस फ़ॉर बासमती राइस' में कहा था कि ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (ऐरिया) तथा राज्य एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (रीप) के साथ बातचीत करने के बाद उसने यह तय किया कि भारत और पाकिस्तान में सिंधु-गंगा के मैदानी भाग में उत्पादित होने वाली कुछ खास किस्मों के चावल को बासमती की मान्यता दी जाएगी।
